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               ओम The Universe  




ओम (Aum) ही परम ब्रह्म निराकार का प्रतिरूप है जिसके महत्व को समझने के लिए इतना ही पर्याप्त है की किसी भी मंत्र का  प्रारम्भ ओम के बिना नही हो सकता है क्योंकि ओम ही सभी विविध मंत्रो का मूल ( बीज) ओम (Aum ) है 

ओम का जाप करने से भव साग़र से पार होना सुनिश्चित है क्या ओम ही ब्रम्हांड है या ओम में ही ब्रम्हांड स्थापित है क्या प्रारम्भ ओम है या अंत ही ओम है क्या समस्त ब्रम्हांड की ऊर्जा ओम से निकलती है अथवा समाहित होती है ये सभी प्रश्न ओम को समझने जानने अथवा मानने के लिए आवश्यक रहे है क्या ओम सत्य है 
क्या सत्य ओम से ही प्रकट होता है अनादि काल से ऋषि महात्माओ विद्वानों   ने ओम की उत्पत्ति निर्माण पर अनेको विधाओ से इस सत्य की खोज करते रहे है 
ओम ही निराकार अखिलेश का प्रतिरूप है जिसके जाप के लिए किसी विशेष विधि को अपनाना नही है सहज स्वभाविक रूप से ओम Aum का जाप करते रहना आनंददायी एवम मंगलहारी है 
ओम के निरंतर जाप से सारी प्रतिकूल परिस्थितियां अनूकूल हो जाती है ओम का जप संजीवनी के समान चमत्कारिक ढंग से जीवनदायनी बूटी है।
यह संजीवनी साधक के जीवन को ही बदल देती है 
साधक ओम aum  जाप से आत्मसात होता है 
जब तक मनुष्य अपने शरीर को ही स्वयं मानता है तब  उसके जीवन मे भौतिक शरीर एवं भौतिक संसार ही उसका सत्य होता है वह इसी शरीर के सुख दुख आनद कष्ट में समाहित रहता है परंतु जब मनुष्य ओम ohm  का जप करने लगता है तब  ध्यान की अवस्था मे उसे शरीर का भाव अचानक गायव हो जाता है तो उसका शरीर एवं संसार का संबंध समाप्त होता प्रतीत होता है 
ओम की शरीर एवम आत्मसात की अनुभूति का माध्यम बनता है ओम  Aum  के निरंतर जाप से ध्यान अवस्था स्थापित होने लगती है और शरीर भाव निरंतर कम होने लगता है 

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शरीर भाव कम होने से आत्मा का भाव प्रकट होने लगता है जैसे जैसे साधक में आत्मा भाव प्रकट होता है साधक में आत्मा एवं ब्रम्हांड की अनुभूति होती है 
ओम की महिमा अवर्णनीय  है  

मुझमे ओम तुझमे ओम ' हम सब मे ओम समाया ।।
ओम बिना न तू न मैं  यह विश्व है ओम की माया  ।।
ओम तो है सोम समान सोम में सोम ओम ने inबनाया ।।
ओम है निराकार ब्रह्म 
यह ब्रह्मांड भी ओम में समाया   ।।

Aum The Universe




 Aum (Aum) is the model of the ultimate Brahman formless whose importance is sufficient to understand that the beginning of any mantra cannot be without Aum because Aum is the root (seed) of all the various mantras Aum (Aum)

 By chanting Aum, you are sure to cross the road. Is Om the universe or is the universe established in Om, is the beginning Om or the end is Om, is the energy of the entire universe emanating from or contained Om?  Are necessary to understand or believe that Om is true

 Does the truth appear from Om itself? Since time immemorial, sage Mahatma scholars have been searching for this truth from many genres on the creation of Om.

 Om is a replica of the formless Akhilesh, who does not have to adopt any special method for chanting. Naturally, chanting Om Aum is joyful and happy.

 All the unfavorable conditions become favorable due to the constant chanting of Om, chanting Om is a miraculously life-giving herb like Sanjeevani.

 This changes the life of the Sanjeevani seeker.

 The seeker is imbibed with chanting Aum

 As long as man considers his body as his own, then the physical body and the physical world are his truth in his life. He remains in the happiness and sorrow of this body, but when a man starts chanting Om Aum then the state of meditation  I suddenly feel a sense of body, then the relationship between his body and the world seems to end.

 The body of Om becomes the medium for the realization of assimilation and with the continuous chanting of Om Aum, the meditative state begins to set in and the body sense starts decreasing continuously.

 The feeling of the soul starts to manifest due to low body rate, as the spirit appears in the seeker, the soul and the universe experience in the seeker.

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 Om Om's glory is indescribable


 Om Tujhme Om Mein Hum Om Om Shaaya Mein Hum.

 Om without neither you nor this world is Om's Maya.

 Om Om is the same Som Som created Som Om.

 Om is formless Brahman

 This universe also merged into Om.

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